आज की हमारी लेखिका इनदिनों खूब चर्चाओं में है, क्यूंकि इनकी नई किताब ऐसे विषय पर आधारित है जिसे लोग पढ़ते तो खूब है लेकिन हम भारतिय खुलेआम उस विषय की चर्चा करने से अक्सर कतराते हैं। जी हां हम बात कर रहे है इरोटिक फिक्शन लेट लतीफ लव की लेखिका सुरभि सिंघल जी की।
सुरभि जी सबसे पहले तो आपको नई किताब 'लेट लतीफ लव' के लिए बधाई। आशा करते है कि किताब को पाठको का भरपूर प्यार मिलेगा।
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| image source; facebook/surbhi singhlal |
शुरुआत करते है परिचय से।
Q आप कहाँ से हो, क्या करती हो ? बचपनकहाँ बीता जानकारी दीजिये।
Ans- मैं मूलतः उत्तर प्रदेश , अमरोहा से हूं व विवाहोपरांत देहरादून में स्थायी रूप से हूं । पेशे से टीचर हूँ व मन, कर्म से लेखिका हूँ । बचपन से ही लिखने पढ़ने की शौकीन थी और जाने अनजाने ख्याली पुलाव मन के कुकर से बाहर आ गया तो किताब में झोंक दिया । तब से लेखन ही मेरे लिए सबकुछ है ।
Q आपकी अबतक तीन किताबें प्रकाशित हो चुकी है। पहली किताब कोनसी थी। कब लिखी और किस विषय पर आधारित थी। इसे लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली ?
Ans- पहली किताब फीवर 104° F थी जिसमे मैंने
हॉस्टल में रहने वाली छोटे शहर से आई लड़कियो की जिंदगी को कहानी के रूप में प्रस्तुत किया है । यह 2017 में आई थी व इसकी प्रेरणा मुझे अपने गुरुजनो स प्राप्त हुई जिन्होंने मेरी लेखनी को कॉलेज के समय मे देखकर मुझे यह सुझाव दिया ।
Q पहली किताब प्रकाशित कहाँ से हुई? कितना संघर्ष करना पड़ा?
Ans- पहली किताब, जाहिर है पहला चाहे जो भी जीवन मे होता है वो बहुत खास होता है । मेरे लिए भी यह मेरे जीवन के खास पलो में से एक थी । सबसे पहले गूगल किया तो मार्केटिंग के लिहाज से ही शायद हिन्दयुग्म का नाम सामने आया और उतावलेपन में मैंने उन्ही को सेल्फ पब्लिशिंग के लिए बिना किसी तरह की जानकारी प्राप्त किये यह सौंप दी । अब लगता है बिना सोचे समझे कुछ भी कर देने का उतावलापन एक नए लेखक में ही हो सकता है ।
Q नई किताब लेट लतीफ लव के बारे में कुछ बताइये ?
Ans- ये एक वयस्क प्रेम कहानी है जिसके पहले पन्ने पर ही सोच समझकर चेतावनी जारी की गई है । हिंदी में कुछ इस तरह का पढ़ने में नहीं आता है , आता भी है तो आटे में नमक बराबर इसलिए कह सकती हूं कि यह हिंदी का प्रथम अति वयस्क उपन्यास हो सकता है मेरी जानकारी के मुताबिक । "फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे" (जो अंग्रेजी का एक विश्व प्रसिद्ध उपन्यास है) से प्रेरित होकर मैंने जाना कि हिंदी में इरॉटिक क्यों न आना चाहिए जिससे इतनी अधिक जनसँख्या वाले देश मे लोग इसे अश्लील न कहकर एक जरुरी मुद्दा खुलकर कहें व इसपर चर्चा करें ।
Q लेट लतीफ लव एक काफी बोल्ड विषय पर आधारित है। इसे लिखने का विचार कहाँ से आया। कितना वक्त शोध में लगा? और किताब से आपको कितनी उम्मीदें है ?
Ans- लिखने के विचार को लेकर मैं पिछले सवाल में साझा कर चुकी हूं । अक्सर हम चीज़ों को कहने से डरते है समाज की चिंता करके जबकि वही समाज इसी से बना होता है । इसके शोध में मुझे काफी दिक्कतें आयी क्योंकि जब पढ़ने बैठी हिंदी में न के बराबर मिला । इसलिए अंग्रेजी की तरफ जाकर काफी कंटेंट मिला जिससे मुझे मदद मिली । इसके अलावा फिल्मे देखीं व वेब सीरीज की तरफ भी आकर्षण हुआ । जिससे मैंने जाना कि मुझे करना क्या होगा ! 2 साल मुझे इसमे लगे तब जाकर मैं कॉंफिडेंट हो पाई ।
Q परिवार वाले आपके लेखन को कितना सपोर्ट करते है ?
Ans - मेरे पति ने हमेशा इसमे मेरा साथ दिया है चाहे मैं जो भी लिखूं । इसके अलावा बाकी सबको भी कोई खासी दिक्कत नहीं है । ये नहीं कह सकती कि सब लोग खासा खुश है क्योंकि यह भी सच्चाई है कि हिंदी लेखन हमे कमाकर नहीं खिला सकता । कई बार विचार मेल नहीं खाते । लेकिन खुशी है कि जीवनसाथी इस सफर में साथ है ।
Q भविष्य में और किन-किन विषय पर लिखना चाहती हैं आप। आगामी प्रोजेक्ट्स क्या क्या है?
Ans- हर जोन में जाना ही मेरी चाहत है । मैं बाल उपन्यास भी लिखना चाहती हूं और स्त्री पीड़ा पर भी । अगला उपन्यास स्त्री पीड़ा पर होगा जिसमें स्त्री की मनोदशा का विवरण होगा । फिर जिस विषय मे पाठको का प्यार मिलेगा व सर आंखों पर ।
Q लेखन के अलावा किन किन चीजों का शौक रखती है आप?
Ans - पेशे से शिक्षिका भी हूँ तो पढ़ाई मेरी आत्मा से जुड़ी है । इसके अलावा परिवार व दोस्तो के साथ घूमने की खासी शौकीन हूँ । हैंगआउट करने हम जाते है व म्युज़ियम देखने भी । घूमने को जहां मिल जाए वहां बढ़िया ।
Q आपके पसंदीदा लेखक कौन है? खाली वक़्त में किस तरह की पुस्तकें पढ़ना पसन्द करती है आप?
Ans- हर जोन में लिखने की चाहत रखती हूं इसलिए हर तरह का पढ़ती हूँ । जब जैसा लिखना हो तब वैसा ही । लेकिन बीच मे स्त्री वेदना की कुछ किताबें मिल जाएं तो वो मन को द्रवित कर देती है तब झुकाव उस ओर बढ़ जाता है ।
Q आपके हमउम्र युवा लेखकों में से किसे पढ़ना आप ज्यादा पसंद करती है ?
Ans- ये निर्भर करता है उस लेखक के किताब लिखने के थीम पर , कई लेखक ऐसे है जिनके टाइटल या उनकी सिनोप्सिस पढ़ने में आकर्षक होती है । जिनमे कोई एक लेखक नहीं है । किसी की कोई किताब अच्छी है तो किसी का कुछ । शुरुवात में हिन्दयुग्म के ही लेखको को पढ़ा लेकिन अब स्वाद अलग हो चुका है । कह सकते है पढ़ने को लेकर भी परिपक्वता आ चुकी है ।
Q अंत मे युवा लेखकों को क्या संदेश देना चाहेंगी आप?
Ans- हर सीमा तोड़कर सिर्फ अपने मन की ओर अपनी लेखनी को अगर बढ़ने दिया जाएगा तो हिंदी लेखन में भी एक क्रांति आ सकती है जिसकी उसे जरूरत है । हिंदी से लोगो की उबासी दूर करने का एकमात्र तरीका मुझे यही नज़र आता है इसलिए ही इरॉटिक में मैंने हाथ डाला । बस नया करते जाओ , वरना गुमनाम तो हो ही । क्या पता इससे एक मायने मिल जाएं कलम को ।
बहुत बहुत धन्यवाद ।


1 टिप्पणियाँ
लेखिका की उत्तम सोच ने प्रभावित किया
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